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8.24.14
उपो॒ हरी॑णां॒ पतिं॒ दक्षं॑ पृ॒ञ्चन्त॑मब्रवम् । नू॒नं श्रु॑धि स्तुव॒तो अ॒श्व्यस्य॑ ॥ (१४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 8.24.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मैं हरि नामक अश्चों के स्वामी एवं अपना बल दूसरों को देने वाले इंद्र की स्तुति करता हूं. मैं व्यश्च ऋषि का पुत्र हूं. मेरी स्तुति सुनो. (१४)
EN English Translation
I praise Indra, the master of ashas called Hari, and who gave his strength to others. I am the son of a sage. Listen to my praise. (14)