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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 24 • Mantra / Rik 21

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 21

8.24.21

Mantra ID: 8.24.21

यस्यामि॑तानि वी॒र्या॒३॒॑ न राधः॒ पर्ये॑तवे । ज्योति॒र्न विश्व॑म॒भ्यस्ति॒ दक्षि॑णा ॥ (२१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.24.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस इंद्र की वीरता के कर्म असीमित हैं, जिसका धन शत्रु नहीं पा सकते एवं जिसका धनदान सब स्तोताओं को इस प्रकार व्याप्त करता है, जैसे प्रकाश आकाश में फैलता है. (२१)

EN English Translation

The deeds of indra's bravery are unlimited, whose wealth cannot find enemies, and whose wealth encompasses all the hymns as the light spreads in the sky. (21)

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