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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 28 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 1

8.28.1

Mantra ID: 8.28.1

ये त्रिं॒शति॒ त्रय॑स्प॒रो दे॒वासो॑ ब॒र्हिरास॑दन् । वि॒दन्नह॑ द्वि॒तास॑नन् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.28.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो तेंतीस देवता कुशों पर बैठे थे, वे हमें समझें एवं दोनों प्रकार का धन दें. (१)

EN English Translation

Thirty-three gods who sat on kushas, understand us and give us both kinds of wealth. (1)

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