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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 32 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 10

8.32.10

Mantra ID: 8.32.10

बृ॒बदु॑क्थं हवामहे सृ॒प्रक॑रस्नमू॒तये॑ । साधु॑ कृ॒ण्वन्त॒मव॑से ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.32.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम महान्‌ मंत्रों वाले, भुजाएं फैलाए हुए एवं लोक की रक्षा के लिए भली प्रकार प्रयत्न करने वाले इंद्र को लोक की रक्षा के लिए बुलाते हैं. (१०)

EN English Translation

We call Indra, who has great mantras, stretches out arms and strives well to protect the people. (10)

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