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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 32 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 14

8.32.14

Mantra ID: 8.32.14

आ॒य॒न्तारं॒ महि॑ स्थि॒रं पृत॑नासु श्रवो॒जित॑म् । भूरे॒रीशा॑न॒मोज॑सा ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.32.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र यज्ञ में आने वाले, युद्धों में अत्यंत स्थिर, अन्न को जीतने वाले एवं शक्ति द्वारा बहुत धन के स्वामी हैं. (१४)

EN English Translation

Indra is the master of many wealth by coming in yajna, very stable in wars, conquering food and powering. (14)

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