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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 32 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 17

8.32.17

Mantra ID: 8.32.17

पन्य॒ इदुप॑ गायत॒ पन्य॑ उ॒क्थानि॑ शंसत । ब्रह्मा॑ कृणोत॒ पन्य॒ इत् ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.32.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे गायको! स्तुति योग्य इंद्र के लिए गाओ. हे स्तोताओ! इंद्र के लिए मंत्र बोलो एवं स्तोत्र बनाओ. (१७)

EN English Translation

Hey singers! Sing to the praiseworthy Indra. This stotao! Speak mantras for Indra and make hymns. (17)

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