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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 33 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 11

8.33.11

Mantra ID: 8.33.11

वृष॑णस्ते अ॒भीश॑वो॒ वृषा॒ कशा॑ हिर॒ण्ययी॑ । वृषा॒ रथो॑ मघव॒न्वृष॑णा॒ हरी॒ वृषा॒ त्वं श॑तक्रतो ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.33.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धनस्वामी इंद्र! तुम्हारे घोड़ों की लगामें अभिलाषापूरक हैं. तुम्हारा सोने का हंटर अभिलाषापूरक है. हे शतक्रतु! तुम्हारा रथ, तुम्हारे घोड़े एवं तुम स्वयं अभिलाषापूरक हो. (११)

EN English Translation

O wealth-owner Indra! The reins of your horses are wishful. Your gold whip is wishful. O shatkratu! Your chariot, your horses and you yourself are aspirational. (11)

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