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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 33 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 15

8.33.15

Mantra ID: 8.33.15

अ॒स्माक॑म॒द्यान्त॑मं॒ स्तोमं॑ धिष्व महामह । अ॒स्माकं॑ ते॒ सव॑ना सन्तु॒ शंत॑मा॒ मदा॑य द्युक्ष सोमपाः ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.33.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे परमपूज्य इंद्र! आज अत्यंत समीपवर्ती हमारे स्तोम नामक यज्ञ को धारण करो. हे दीप्तिशाली एवं सोमरस पीने वाले इंद्र! तुम्हारे मद के लिए होने वाले हमारे यज्ञ कल्याणकारक हों. (१५)

EN English Translation

O Supreme Indra! Today hold the yajna called Our Stome very near. O Indra, who drinks the radiant and the somras! Let our yajnas for your item be beneficial. (15)

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