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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 33 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 9

8.33.9

Mantra ID: 8.33.9

य उ॒ग्रः सन्ननि॑ष्टृतः स्थि॒रो रणा॑य॒ संस्कृ॑तः । यदि॑ स्तो॒तुर्म॒घवा॑ श‍ृ॒णव॒द्धवं॒ नेन्द्रो॑ योष॒त्या ग॑मत् ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.33.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब उग्र, शत्रुओं के घेरे से रहित, स्थिर, युद्ध के लिए शस्त्रों से सुशोभित एवं धनवान्‌ इंद्र स्तोता की पुकार सुन लेते हैं तो अन्यत्र न जाकर वहीं जाते हैं. (९)

EN English Translation

When the fierce, devoid of the circle of enemies, stable, adorned with weapons for war and rich-minded, hear the call of Indra Stota, they do not go elsewhere. (9)

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