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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 34 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 34 • ऋचा / मन्त्र 10

8.34.10

Mantra ID: 8.34.10

आ या॑ह्य॒र्य आ परि॒ स्वाहा॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ । दि॒वो अ॒मुष्य॒ शास॑तो॒ दिवं॑ य॒य दि॑वावसो ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.34.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्वामी इंद्र! तुम चारों ओर से आओ. तुम्हारे पीने के लिए मैं स्वाहा बोलकर सोमरस देता हूं. हे दीप्त हवि वाले इंद्र! तुम झुलोक का शासन करते हो, इसलिए झुलोक में जाओ. (१०)

EN English Translation

O Lord Indra! You come from around. For you to drink, I give swaha bol and somras. O indra of the bright soul! You rule the jhuloka, so go to the jhullok. (10)

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