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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 38 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 38 • ऋचा / मन्त्र 5

8.38.5

Mantra ID: 8.38.5

इ॒मा जु॑षेथां॒ सव॑ना॒ येभि॑र्ह॒व्यान्यू॒हथुः॑ । इन्द्रा॑ग्नी॒ आ ग॑तं नरा ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.38.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यज्ञ के नेता इंद्र व अग्नि! तुम जिन सवनों के द्वारा हव्य वहन करते हो, उन्हीं में सम्मिलित बनो. तुम यहां आओ. (५)

EN English Translation

O lord of the yajna, Indra and Agni! Join the suaves through which you carry the havan. You come here. (5)

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