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8.43.17
उ॒त त्वा॑ग्ने॒ मम॒ स्तुतो॑ वा॒श्राय॑ प्रति॒हर्य॑ते । गो॒ष्ठं गाव॑ इवाशत ॥ (१७)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.43.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! मेरी स्तुतियां तुम्हारे पास उसी प्रकार जा रही हैं, जिस प्रकार उत्सुक गाएं रंभाती हुई गोशाला में बछड़ों के पास जाती हैं. (१७)
EN English Translation
O agni! My praises go to you in the same way that eager cows go to calves in the goshala. (17)