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8.44.28
अ॒यम॑ग्ने॒ त्वे अपि॑ जरि॒ता भू॑तु सन्त्य । तस्मै॑ पावक मृळय ॥ (२८)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 8.44.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सेवा योग्य एवं पवित्रकर्तता अग्नि! हमारा स्तोता तुम्हारी स्तुति करे और तुम उसे सुख दो. (२८)
EN English Translation
O agni of service and holyness! May our hymn praise you and you give him pleasure. (28)