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8.44.6
म॒न्द्रं होता॑रमृ॒त्विजं॑ चि॒त्रभा॑नुं वि॒भाव॑सुम् । अ॒ग्निमी॑ळे॒ स उ॑ श्रवत् ॥ (६)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.44.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मैं प्रसन्न, देवों को बुलाने वाले, ऋत्विज्, विचित्र प्रकाश वाले एवं दीप्तिरूपी धन से युक्त अग्नि की स्तुति करता हूं. अग्नि मेरी स्तुति सुनें. (६)
EN English Translation
I praise the agni of delight, the one who calls the gods, the ritwij, the strange light, and the radiant wealth. Fire listen to my praise. (6)