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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 14

8.45.14

Mantra ID: 8.45.14

क॒कु॒हं चि॑त्त्वा कवे॒ मन्द॑न्तु धृष्ण॒विन्द॑वः । आ त्वा॑ प॒णिं यदीम॑हे ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कवि, शत्रुपराभवकारी एवं वणिकवृत्ति वाले इंद्र! जब हम तुमसे अभीष्ट वस्तु की याचना करें, उस समय हमारा सोम बैल की ठाट के समान ऊंचा होकर तुम्हें प्रसन्न करे. (१४)

EN English Translation

O poet, the enemy,the loser and the eternal Indra! When we ask you for what is desired, let our mon please you by being as high as a bull's trunk. (14)

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