Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 47 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 47 • ऋचा / मन्त्र 14

8.47.14

Mantra ID: 8.47.14

यच्च॒ गोषु॑ दु॒ष्ष्वप्न्यं॒ यच्चा॒स्मे दु॑हितर्दिवः । त्रि॒ताय॒ तद्वि॑भावर्या॒प्त्याय॒ परा॑ वहाने॒हसो॑ व ऊ॒तयः॑ सुऊ॒तयो॑ व ऊ॒तयः॑ ॥ (१४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.47.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्वर्ण की पुत्री एवं विभावरी उषा! हमारी गायों में अथवा हम में जो दुःख छिपा है, वह मुझ आप्त्यत्रित के कल्याण के लिए दूर करो. तुम्हारी रक्षा उपद्रवरहित एवं शोभन है. (१४)

EN English Translation

O daughter of gold and vibhavari Usha! Remove the sorrow hidden in our cows or in us for the welfare of me. Your protection is foolproof and beautiful. (14)

卐 HinduText AI