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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 48 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 8

8.48.8

Mantra ID: 8.48.8

सोम॑ राजन्मृ॒ळया॑ नः स्व॒स्ति तव॑ स्मसि व्र॒त्या॒३॒॑स्तस्य॑ विद्धि । अल॑र्ति॒ दक्ष॑ उ॒त म॒न्युरि॑न्दो॒ मा नो॑ अ॒र्यो अ॑नुका॒मं परा॑ दाः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.48.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे राजा सोम! हमें विनाशरहित बनाने के लिए सुखी करो. व्रतधारी हम तुम्हारे ही हैं, इसे जानो. हे इंद्र! हमारा शत्रु क्रोध में भरा हुआ एवं वृद्धि प्राप्त करके जा रहा है. इसके क्रोध से हमारा उद्धार करो. (८)

EN English Translation

O King Mon! Make us happy to make us without destruction. We are yours, know it. O Indra! Our enemy is full of anger and is going to get a rise. Save us from its wrath. (8)

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