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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 49 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 5

8.49.5

Mantra ID: 8.49.5

त्वमित्स॒प्रथा॑ अ॒स्यग्ने॑ त्रातरृ॒तस्क॒विः । त्वां विप्रा॑सः समिधान दीदिव॒ आ वि॑वासन्ति वे॒धसः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.49.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम रक्षक, सच्चे, अधिक बुद्धिमान्‌ एवं सभी प्रकार विशाल हो. हे भली प्रकार दीप्त अग्नि! मेधावी स्तोता तुम्हारी सेवा करते हैं. (५)

EN English Translation

O agni! You are protector, truer, more intelligent and vast in all respects. O beautiful agni! Meritorious hymns serve you. (5)

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