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8.49.7
यथा॑ चिद्वृ॒द्धम॑त॒समग्ने॑ सं॒जूर्व॑सि॒ क्षमि॑ । ए॒वा द॑ह मित्रमहो॒ यो अ॑स्म॒ध्रुग्दु॒र्मन्मा॒ कश्च॒ वेन॑ति ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.49.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे मित्रों के पूजक अग्नि! तुम धरती पर जिस प्रकार सूखे काठ को जलाते हो, उसी प्रकार जो हमारा द्रोही है एवं जो हमारे प्रति दुष्ट बुद्धि रखता है, उसे जलाओ. (७)
EN English Translation
O worshiper of friends, agni! Just as you burn dry wood on the earth, burn him who is our enemy and who has evil intelligence towards us. (7)