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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 5 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 5 • ऋचा / मन्त्र 8

8.5.8

Mantra ID: 8.5.8

येभि॑स्ति॒स्रः प॑रा॒वतो॑ दि॒वो विश्वा॑नि रोच॒ना । त्रीँर॒क्तून्प॑रि॒दीय॑थः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.5.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! तीन दिन और तीन रात तक तुम घोड़ों की सहायता से दीप्ति वाले स्थानों पर आओ. (८)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! For three days and three nights you come to the places of glistening with the help of horses. (8)

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