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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 50 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 50 • ऋचा / मन्त्र 1

8.50.1

Mantra ID: 8.50.1

उ॒भयं॑ श‍ृ॒णव॑च्च न॒ इन्द्रो॑ अ॒र्वागि॒दं वचः॑ । स॒त्राच्या॑ म॒घवा॒ सोम॑पीतये धि॒या शवि॑ष्ठ॒ आ ग॑मत् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.50.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र हमारे दोनों प्रकार के वचनों को शीघ्र सुनें. इंद्र हमारे यज्ञकर्म के साथ रहकर धनवान्‌ तथा शक्तिशाली हों एवं सोमरस पीने के लिए आवें. (१)

EN English Translation

Indra should listen to both our words quickly. May Indra be rich and powerful by staying with our yajnakarma and come to drink someras. (1)

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