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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 51 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 7

8.51.7

Mantra ID: 8.51.7

विश्वे॑ त इन्द्र वी॒र्यं॑ दे॒वा अनु॒ क्रतुं॑ ददुः । भुवो॒ विश्व॑स्य॒ गोप॑तिः पुरुष्टुत भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तयः॑ ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.51.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र तुम्हारा अनुकरण करते हुए सभी देव शक्ति एवं बुद्धि को धारण करते हैं. हे सभी गायों के स्वामी इंद्र! तुम बहुतों द्वारा स्तुत हो. इंद्र के दान कल्याण करने वाले हैं. (७)

EN English Translation

O Indra, all the gods possess power and wisdom by imitating you. O Lord of all cows Indra! You are praised by many. Indra's donations are welfare-doers. (7)

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