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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 52 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 12

8.52.12

Mantra ID: 8.52.12

अ॒स्मे रु॒द्रा मे॒हना॒ पर्व॑तासो वृत्र॒हत्ये॒ भर॑हूतौ स॒जोषाः॑ । यः शंस॑ते स्तुव॒ते धायि॑ प॒ज्र इन्द्र॑ज्येष्ठा अ॒स्माँ अ॑वन्तु दे॒वाः ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.52.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

भयंकर एवं वर्षा करने वाले बादल एवं युद्ध में पुकार सुनकर शत्रु का नाश करने वाले इंद्र मंत्रपाठ करने वाले एवं स्तोता के समीप जल्दी आते हैं. वे इंद्र एवं प्रमुख देव हमारी रक्षा करें. (१२)

EN English Translation

Indra, who destroys the enemy after hearing the fierce and raining clouds and the call in the war, comes quickly to the chanter and the hymn. Let them indra and the chief god protect us. (12)

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