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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 53 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 1

8.53.1

Mantra ID: 8.53.1

उत्त्वा॑ मन्दन्तु॒ स्तोमाः॑ कृणु॒ष्व राधो॑ अद्रिवः । अव॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ जहि ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.53.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वज्रधारी इंद्र! स्तुतियां तुम्हें अधिक प्रसन्न करें. तुम हमें धन दो एवं ब्राह्मणद्वेषियों को मारो. (१)

EN English Translation

O thunderbolt Indra! Praises please you more. You give us money and kill the Brahmins. (1)

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