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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 53 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 5

8.53.5

Mantra ID: 8.53.5

त्यं चि॒त्पर्व॑तं गि॒रिं श॒तव॑न्तं सह॒स्रिण॑म् । वि स्तो॒तृभ्यो॑ रुरोजिथ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.53.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने स्तोताओं के कल्याण के लिए टुकड़ों वाले एवं सैकड़ों तथा हजारों जलों से युक्त मेघ को वज्र से भिन्न किया था. (५)

EN English Translation

O Indra! You separated the cloud with fragments and containing hundreds and thousands of water from the thunderbolt for the welfare of the psalms. (5)

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