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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 56 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 56 • ऋचा / मन्त्र 17

8.56.17

Mantra ID: 8.56.17

शश्व॑न्तं॒ हि प्र॑चेतसः प्रति॒यन्तं॑ चि॒देन॑सः । देवाः॑ कृणु॒थ जी॒वसे॑ ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.56.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे उत्तम ज्ञान वाले देवो! हमारी ओर बार-बार आने वाले पापी शत्रुओं को हमारे जीवन के लिए हमसे अलग करो. (१७)

EN English Translation

O gods of the best knowledge! Separate sinners who come to us again and again from us for our lives. (17)

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