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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 56 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 56 • ऋचा / मन्त्र 2

8.56.2

Mantra ID: 8.56.2

मि॒त्रो नो॒ अत्यं॑ह॒तिं वरु॑णः पर्षदर्य॒मा । आ॒दि॒त्यासो॒ यथा॑ वि॒दुः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.56.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मित्र, वरुण, अर्यमा और आदित्य हमें पाप से पार उतारें, क्योंकि वे हमारे दुःसह कार्यो को जानते हैं. (२)

EN English Translation

Friends, Varun, Aryama and Aditya, let us overcome sin, because they know our evil deeds. (2)

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