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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 57 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 57 • ऋचा / मन्त्र 1

8.57.1

Mantra ID: 8.57.1

आ त्वा॒ रथं॒ यथो॒तये॑ सु॒म्नाय॑ वर्तयामसि । तु॒वि॒कू॒र्मिमृ॑ती॒षह॒मिन्द्र॒ शवि॑ष्ठ॒ सत्प॑ते ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.57.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अतिशय शक्तिशाली, हिंसकों को हराने वाले, बहुत कर्म करने वाले एवं सज्जनपालक इंद्र! हम सुरक्षा और सुख पाने के लिए तुम्हें रथ के समान बार-बार बुलाते हैं. (१)

EN English Translation

O you who are very powerful, defeaters of the violent, doers of great deeds and gentlemen, Indra! We call you again and again like a chariot to get safety and happiness. (1)

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