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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 57 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 57 • ऋचा / मन्त्र 3

8.57.3

Mantra ID: 8.57.3

यस्य॑ ते महि॒ना म॒हः परि॑ ज्मा॒यन्त॑मी॒यतुः॑ । हस्ता॒ वज्रं॑ हिर॒ण्यय॑म् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.57.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे महान्‌ इंद्र! तुम्हारी महिमा के कारण तुम्हारे हाथ धरती में सब जगह व्याप्त हिरण्यमय वज्र को पकड़ते हैं. (३)

EN English Translation

O great Indra! Because of your glory, your hands hold the deery vajra everywhere in the earth. (3)

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