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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 58 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 15

8.58.15

Mantra ID: 8.58.15

अ॒र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म् । स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म् ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.58.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बालक के समान छोटे शरीर वाले कुमार इंद्र प्रशंसनीय रथ पर बैठते हैं. इंद्र महान्‌ एवं माता-पिता के सामने इधरधर दौड़ने वाले मृगशावक के समान अनेक कर्मो वाले मेघ को वर्षा के लिए प्रेरित करते हैं. (१५)

EN English Translation

Kumar Indra, with a small body like a child, sits on the admirable chariot. Indra inspires the cloud of many acts to rain like the mrigshawak who runs around in front of the great and parents. (15)

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