Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 58 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 5

8.58.5

Mantra ID: 8.58.5

आ हर॑यः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ । यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.58.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दीप्तिशाली एवं हरितवर्ण के अश्च इंद्र को कुश पर स्थापित करें. हम वहां स्थित इंद्र की स्तुति करेंगे. (५)

EN English Translation

Install Indra, the assh indra of the bright and green golden, on the kusha. We will praise Indra located there. (5)

卐 HinduText AI