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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 59 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 59 • ऋचा / मन्त्र 11

8.59.11

Mantra ID: 8.59.11

अ॒न्यव्र॑त॒ममा॑नुष॒मय॑ज्वान॒मदे॑वयुम् । अव॒ स्वः सखा॑ दुधुवीत॒ पर्व॑तः सु॒घ्नाय॒ दस्युं॒ पर्व॑तः ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.59.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारे मित्र पर्वत ऋषि तुम्हारे अतिरिक्त किसी अन्य के लिए यज्ञ करने वाले, मानव से भिन्न, यज्ञरहित व देवों को न मानने वाले को स्वर्ग से नीचे गिरा देते हैं एवं दस्यु को मृत्यु की ओर प्रेरित करते हैं. (११)

EN English Translation

O Indra! Your friend mountain sages cast down from heaven the one who performs yajna for someone other than you, who is different from human beings, without a yagna and who does not believe in gods, and drives the bandit to death. (11)

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