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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 59 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 59 • ऋचा / मन्त्र 14

8.59.14

Mantra ID: 8.59.14

भूरि॑भिः समह॒ ऋषि॑भिर्ब॒र्हिष्म॑द्भिः स्तविष्यसे । यदि॒त्थमेक॑मेक॒मिच्छर॑ व॒त्सान्प॑रा॒ददः॑ ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.59.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सब लोगों द्वारा पूज्य इंद्र! बहुत से ऋषियों और ऋत्विजों द्वारा तुम्हारी स्तुति की जाती है. हे शत्रुनाशक इंद्र! तुम स्तोताओं को एक-एक करके अनेक प्रकार से बछड़े देते हो. (१४)

EN English Translation

O Indra, revered by all people! You are praised by many sages and ritvijas. O destroyer Indra! You give calves to the psalms one by one in many ways. (14)

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