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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 60 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 60 • ऋचा / मन्त्र 12

8.60.12

Mantra ID: 8.60.12

अ॒ग्निं वो॑ देवय॒ज्यया॒ग्निं प्र॑य॒त्य॑ध्व॒रे । अ॒ग्निं धी॒षु प्र॑थ॒मम॒ग्निमर्व॑त्य॒ग्निं क्षैत्रा॑य॒ साध॑से ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.60.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमानो! मैं तुम्हारे देवसंबंधी यज्ञ के आरंभ होने पर अग्नि की स्तुति करता हूं. मैं यज्ञ प्रारंभ करने के समय, बंधु-भाव प्राप्त होने पर एवं क्षेत्र-लाभ होने पर सब देवों से पहले अग्नि की स्तुति करता हूं. (१२)

EN English Translation

O hosts! I praise the agni at the beginning of your dev-related yajna. I praise agni before all the gods at the time of starting the yajna, when i get brotherhood and gain territory. (12)

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