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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 63 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 13

8.63.13

Mantra ID: 8.63.13

अ॒हं हु॑वा॒न आ॒र्क्षे श्रु॒तर्व॑णि मद॒च्युति॑ । शर्धां॑सीव स्तुका॒विनां॑ मृ॒क्षा शी॒र्षा च॑तु॒र्णाम् ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.63.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं यज्ञदीक्षा के लिए बुलाए जाने पर शत्रुगर्वनाशक, ऋक्षपुत्र एवं श्रुतर्वा नामक राजाओं द्वारा दिए गए बालों वाले चार घोड़ों का शीश इस प्रकार स्पर्श करता हूं, जिस प्रकार लोग बालों को छूते हैं. (१३)

EN English Translation

When I am called for yajnadiksha, I touch the shisha of four horses with hair given by the kings of Shatrugaramakta, Rikshputra and Shrutrva in such a way that people touch the hair. (13)

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