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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 64 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 4

8.64.4

Mantra ID: 8.64.4

अ॒यम॒ग्निः स॑ह॒स्रिणो॒ वाज॑स्य श॒तिन॒स्पतिः॑ । मू॒र्धा क॒वी र॑यी॒णाम् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.64.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये अग्नि सैकड़ों और हजारों प्रकार के अन्नों के पालक, श्रेष्ठ, मेधावी एवं धनों के स्वामी हैं. (४)

EN English Translation

These agnis are the guardians, the best, the brightest and the masters of wealth of hundreds and thousands of types of food. (4)

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