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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 65 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 65 • ऋचा / मन्त्र 11

8.65.11

Mantra ID: 8.65.11

अनु॑ त्वा॒ रोद॑सी उ॒भे क्रक्ष॑माणमकृपेताम् । इन्द्र॒ यद्द॑स्यु॒हाभ॑वः ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.65.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शत्रुओं का विनाश करने वाले इंद्र! जब तुम दस्यु लोगों का नाश करते हो, तभी द्यावा-पृथिवी दोनों तुम्हारा कल्याण करते हैं. (११)

EN English Translation

O Indra, the destroyer of enemies! When you destroy bandits, only then both Dyava and Prithivi do you well. (11)

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