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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 65 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 65 • ऋचा / मन्त्र 5

8.65.5

Mantra ID: 8.65.5

म॒रुत्व॑न्तमृजी॒षिण॒मोज॑स्वन्तं विर॒प्शिन॑म् । इन्द्रं॑ गी॒र्भिर्ह॑वामहे ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.65.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम मरुतों से युक्त, ऋजीष के भागी, वृद्धियुक्त एवं महान्‌ इंद्र को स्तुतियों द्वारा बुलाते हैं. (५)

EN English Translation

We call the lord, the parti of the sage, the rising and the great Indra, with praises. (5)

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