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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 66 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 66 • ऋचा / मन्त्र 11

8.66.11

Mantra ID: 8.66.11

तु॒वि॒क्षं ते॒ सुकृ॑तं सू॒मयं॒ धनुः॑ सा॒धुर्बु॒न्दो हि॑र॒ण्ययः॑ । उ॒भा ते॑ बा॒हू रण्या॒ सुसं॑स्कृत ऋदू॒पे चि॑दृदू॒वृधा॑ ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.66.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारा धनुष अनेक बाण फेंकने वाला, भली प्रकार बना हुआ एवं सुखदाता है तथा तुम्हारा बाण सोने का है. तुम्हारी भुजाएं रमणीय, भली प्रकार अलंकृत एवं युद्ध में हनन करने वाली हैं. (११)

EN English Translation

O Indra! Your bow is a many-arrow thrower, well-formed and pleasing, and your arrow is of gold. Your arms are delightful, well-embellished and violative in war. (11)

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