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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 7 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 7 • ऋचा / मन्त्र 10

8.7.10

Mantra ID: 8.7.10

त्रीणि सरांसि पृश्नयो दुदुह्ले व्रिणे मधु. उत्सं कवन्धमुद्रिणम्‌ ..(१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.7.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वज्रधारी इंद्र के लिए पृश्चियों ने सोमरस को झरनों, जल और मेघ से दुहा था. (१०)

EN English Translation

For the thunderous Indra, the earth had milked Somras with waterfalls, water and clouds. (10)

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