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8.74.3
अ॒यं वां॒ कृष्णो॑ अश्विना॒ हव॑ते वाजिनीवसू । मध्वः॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.74.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अन्नयुक्त धन के स्वामी अश्विनीकुमारो! यह कृष्ण नामक ऋषि मधुर सोमरस पीने के लिए तुम्हें बुलाता है. (३)
EN English Translation
O Lord of the riches, O Ashwinikumaro! It calls you to drink the sage Madhur Somras named Krishna. (3)