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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 82 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 82 • ऋचा / मन्त्र 15

8.82.15

Mantra ID: 8.82.15

आदु॑ मे निव॒रो भु॑वद्वृत्र॒हादि॑ष्ट॒ पौंस्य॑म् । अजा॑तशत्रु॒रस्तृ॑तः ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.82.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वृत्रह॑ता इंद्र ने वृत्र का निवारण किया, अपने बल का प्रयोग किया एवं वे अजातशत्रु बने. (१५)

EN English Translation

Vrithrahita Indra resisted the vrithra, used his force and became Ajatashatru. (15)

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