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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 82 • Mantra / Rik 19

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 82 • ऋचा / मन्त्र 19

8.82.19

Mantra ID: 8.82.19

कया॒ त्वं न॑ ऊ॒त्याभि प्र म॑न्दसे वृषन् । कया॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥ (१९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.82.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अभिलाषापूरक इंद्र! तुम किन रक्षासाधनों द्वारा हमें प्रमुदित करोगे एवं किस प्रकार स्तोताओं को धन दोगे? (१९)

EN English Translation

Oh, this desireful Indra! By what means of defense will you make us rejoice and how will you give money to the stoes? (19)

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