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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 82 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 82 • ऋचा / मन्त्र 2

8.82.2

Mantra ID: 8.82.2

नव॒ यो न॑व॒तिं पुरो॑ बि॒भेद॑ बा॒ह्वो॑जसा । अहिं॑ च वृत्र॒हाव॑धीत् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.82.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वृत्रहंता इंद्र ने भुजाओं की शक्ति से निन्यानवे शन्रुपुरियों को तोड़ा एवं मेघ का हनन किया. (२)

EN English Translation

Vrithrahanta Indra broke the ninety-nine Shannupuris with the power of the arms and violated the cloud. (2)

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