Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 85 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 12

8.85.12

Mantra ID: 8.85.12

तद्वि॑विड्ढि॒ यत्त॒ इन्द्रो॒ जुजो॑षत्स्तु॒हि सु॑ष्टु॒तिं नम॒सा वि॑वास । उप॑ भूष जरित॒र्मा रु॑वण्यः श्रा॒वया॒ वाचं॑ कु॒विद॒ङ्ग वेद॑त् ॥ (१२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.85.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विज्‌! इंद्र जो चाहते हैं, तुम वही करो. हे स्तोता! शोभन स्तुति करने वाले इंद्र की स्तुति करो एवं नमस्कार द्वारा उनकी सेवा करो. तुम अपने को अलंकृत करो. रोओ मत. इंद्र को अपना स्तुतिवचन सुनाओ. इंद्र तुम्हें बहुत धन दे. (१२)

EN English Translation

Hey, Ritwiz! Indra does what you want. This is the hymn! Praise Indra, who praises Shobhan, and serve him with a salutation. You embellish yourself. Do not cry. Recite your praises to Indra. Indra give you a lot of money. (12)

卐 HinduText AI