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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 86 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 1

8.86.1

Mantra ID: 8.86.1

या इ॑न्द्र॒ भुज॒ आभ॑रः॒ स्व॑र्वा॒ँ असु॑रेभ्यः । स्तो॒तार॒मिन्म॑घवन्नस्य वर्धय॒ ये च॒ त्वे वृ॒क्तब॑र्हिषः ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.86.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सुखयुक्त एवं धनस्वामी इंद्र! तुम असुरों के पास से जो धन छीन लाये हो, उस धन से स्तोता को बढ़ाओ. वह स्तोता तुम्हारे लिए कुश बिछा चुका है. (१)

EN English Translation

O happy and rich Indra! Increase the hymn with the money you have taken away from the asuras. That hymn has laid the cushion for you. (1)

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