Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 86 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 2

8.86.2

Mantra ID: 8.86.2

यमि॑न्द्र दधि॒षे त्वमश्वं॒ गां भा॒गमव्य॑यम् । यज॑माने सुन्व॒ति दक्षि॑णावति॒ तस्मि॒न्तं धे॑हि॒ मा प॒णौ ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.86.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारे पास जो घोड़े, गाएं एवं अविनाशी धन है, वह सोमरस निचोड़ने वाले तथा दक्षिणा देने वाले यजमान को दो, दान न करने वाले पणि को मत दो. (२)

EN English Translation

O Indra! Give the horses, cows and indestructible wealth that you have, to the host who squeezes the somras and gives dakshina, and do not give it to the non-donating pany. (2)

卐 HinduText AI