Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 87 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 87 • ऋचा / मन्त्र 1

8.87.1

Mantra ID: 8.87.1

इन्द्रा॑य॒ साम॑ गायत॒ विप्रा॑य बृह॒ते बृ॒हत् । ध॒र्म॒कृते॑ विप॒श्चिते॑ पन॒स्यवे॑ ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.87.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे उदगाताओ! मेधावी, महान्‌, यज्ञकर्मकर्तता, विद्वान्‌ एवं स्तोत्रों के अभिलाषी इंद्र को बृहत्‌ साम गाकर सुनाओ. (१)

EN English Translation

O ugatao! Sing a great sum to indra, the bright, the great, the seeker of the yagnakarta, the scholar and the desire of the hymns. (1)

卐 HinduText AI