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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 88 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 88 • ऋचा / मन्त्र 4

8.88.4

Mantra ID: 8.88.4

अन॑र्शरातिं वसु॒दामुप॑ स्तुहि भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तयः॑ । सो अ॑स्य॒ कामं॑ विध॒तो न रो॑षति॒ मनो॑ दा॒नाय॑ चो॒दय॑न् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.88.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोता! इंद्र की स्तुति करो. वह पापरहित को धन देते हैं एवं दानशील हैं. इंद्र का दान कल्याणकारी है. इंद्र यजमान के लिए धन देने को अपने मन को प्रेरित करते हैं, उसकी अभिलाषाओं में बाधा नहीं डालते. (४)

EN English Translation

This is the hymn! Praise Indra. He gives money to the sinless and is charitable. Indra's donation is beneficial. Indra inspires his mind to give money for the host, does not hinder his desires. (4)

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