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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 88 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 88 • ऋचा / मन्त्र 5

8.88.5

Mantra ID: 8.88.5

त्वमि॑न्द्र॒ प्रतू॑र्तिष्व॒भि विश्वा॑ असि॒ स्पृधः॑ । अ॒श॒स्ति॒हा ज॑नि॒ता वि॑श्व॒तूर॑सि॒ त्वं तू॑र्य तरुष्य॒तः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.88.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र । तुम युद्धों में सभी शत्रुसेनाओं को पराजित करते हो. हे शत्रुबाधक इंद्र! तुम दैत्यहंता, असुरो के शत्रुओं को उत्पन्न करने वाले एवं समस्त शत्रुओं के हिंसक हो. (५)

EN English Translation

O Indra. You defeat all enemies in the wars. O enemie stopper, Indra! You are the datya destroyer , the creator of the enemies of the asuras, and dangerous to all the enemies. (5)

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